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Childhood बचपन

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 सकुन  जब ना बचपन भुलता है ना प्राकृति ना घर ना घरों के आंगन आगे चल कर आप चाहे कितने भी अमीर हो जाओ चाहे राजे बन जाओ वह दिन आप नही बना सकते जो बचपन में मां बाप के सिर पर बहारें लूटी हों तब तो रब्ब भी याद नहीं रहता यह अवस्था या बचपन अगर किसी ने अपने पैत्रृक गांव में देखा जब औरते अपने हाथो से अपने घर को कच्ची मिट्टी से बना घरों को हार शंगार करती थी  आज कोठियों में कोई renovation करना हो    तो पैसा पहले चाहिए लेकिन इस जमाने में सब फ्री मिटी से ,जंगल से, वृक्षों से और पशुओं से मिलता था 1964 में हम ने अपनी मां जी के साथ कच्चे घरों की रेनोवेशन  किया वह रात को लालटेन जगा कर भी घर सुंदर रखने का काम करती थी दिन में गर्मी अधिक होने से दिन में दुसरे काम अधिक होने से समय को लोग adjust कर लेते थे आज पंजाब हरियाणा में लगभग उन सब के पास सुंदर कोठियां हैं जिन्होंने यह दिन देखे परंतु सकुन प्राकृति वाले घरों से कम है कारण कोठियों के आंगन है नही,कोठियां चारो तरफ से बंद ,खिड़कियां बंद ताजा हवा नही ,सूर्य नही चांद तारो से मुंह छुपा लिया physical work नहीं पशुओं का ताजा दूध नही...

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खटाखट खटाखट

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 खटाखट  खटाखट राहुल के खटाखट खटाखट मंत्र या आईडिया  हर महीने 8500 रुपए गरीबी रेखा से नीचे  सभी परिवार को देने के वायदे ने लोकसभा के 2024 के चुनाव में BJP को बसाखिओं पर रख दिया था  लेकिन अभी यह मंत्र राहुल की नकल कर BJP ने  लागु कर के महाराष्ट्र बिहार को  जीत लिया  वरना बीजेपी खुला पैसा जनता को बाटने के पक्ष में नहीं थी अभी वोट की कदर को पैसे का लालच  खत्म कर देगा बिहार में शरेआम स्कीम के नाम से सिद्दा औरतो के खाते में पैसा डाल कर का इस का असर उम्मीद से  अधिक देखने को मिला बिहार वास्तव में एक गरीब राज्य है औरत ने घर चलाना होता है अधिक से अधिक औरत की मदद होनी चाहिए परन्तु यह स्थाई नौकरी के बिना नहीं हो सकता सच्चाई यह है की जनता समझ गई है सरकारों को वोट की चोट से ही हासिल करना है मुफतखोरी राष्ट्रीय गर्व को खत्म करती है ,वोट चोरी के रास्ते खुलते हैं नौकरी बंद हो जाती हैं जिस ने वोट बेच दिया नौकरी किस मुंह से मांगेगा

गुरू तेग बहादुर हिंद की चादर

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 गुरू तेग बहादुर हिंद की चादर सिख धर्म में भक्ति और शक्ति साथ साथ रहते हैं किसी जुल्म के विरुद्ध दोनो का इस्तेमाल होता है सिख धर्म का जन्म कुर्बानी या रक्षक के लिए हुआ सिख गुरुओं को मानते हैं राजो को नही सिख धर्म का लक्ष्य जरूरतमंद  की सेवा करना है सख्त मेहनत करना  परमात्मा की उपमा करना अधिक को बांट के खाना है चडदीकला में जीवन जीना है यह तभी होगा  जब दढिता(determination) देख मौत भी डरने लगे गुरु तेग बहादुर जी और उस के तीन साथियों भाई मतिदास भाई सतिदास और भाई दियाला जी को तस्वीरों में देखे  मौत का कोई भय ही नही लकड़ी की तरह चिरा जा रहा है पानी में उबाला जा रहा है जीवित को रूई में लपेट कर  गुरु जी के सामने आग लगाई जा रही है ताकि गुरू जी इस्लाम  को धारण कर लें अगले दिन गुरु जी का सिर कलम कर दिया गया किसी ने भी सि तक नहीं किया यहां भक्ति में शक्ति का जलवा  हजारों लोगो के सामने  हुआ औरगजेब गुरु जी को करामात दिखाने के लिए बोल  रहा था गुरु जी ने जवाब दिया हमारा धर्म करामात के विरुद्ध है हम बहादुर हैं आप कायर हो हम से क्यों डर रहे हो जो करना करो...

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 नारी शक्ति बिहार (जीविका दीदी दस हजारी योजना ) संख्या 10 लाख 58 हजार 618 ग्रुप एक ग्रुप की संख्या 15 से 25 एक स्कूल की तरह हेड मैडम हर ग्रुप में जिन्होंने गाड़ी को टॉप गियर में डाल दिया जीवन भर की बदनामी नारी ने बिहार में जो एकजुटता दिखाई वह ना तो नीतीश जी को पता था न बीजेपी को और न ही गोदी मीडिया को की यह सोना कानों में जख्म कर देगा सारी पोल पट्टी खुल जायेगी बाद में दुसरे राज्य वाले जाग जाएं गे गोदी मीडिया तो 140-150 सीटे बता कर सरकार को खुश कर रहा था उन को क्या पता था    वह भी झूठे पड़ जायेंगे  जब 202 सीटे पर जीविका दीदी ने शक्ति दिखा दी इतनी तो जरूरत नहीं थी 122 सीटे चाहिए थी एक चोर जब अपना घर का अनाज उठाए गा तो ज्यादा से ज्यादा 30kgs परंतु जब कोई चौरी का या मुफ्त का मिले 60 kgs उठा लेता है इसी प्रकार जीविका दीदी को पता था पहले तो कभी 10हजार मिला नही बल्कि उन का बकाया भी नही मिला था अभी इतना हेड मैडम कैसे दिला रही है कह रही है बस वोट वाले दिन सब ने पहुंचना है बेचारी अनपढ़ गरीब मान लेती है क्यों की बिहार में गरीबी बहुत है दुख लगता है मरता क्या नही करता मेरी इच्छा ...

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