गुरू तेग बहादुर हिंद की चादर
गुरू तेग बहादुर हिंद की चादर
सिख धर्म में भक्ति और शक्ति साथ साथ रहते हैं किसी जुल्म के विरुद्ध दोनो का इस्तेमाल होता है सिख धर्म का जन्म कुर्बानी या रक्षक के लिए हुआ सिख गुरुओं को मानते हैं राजो को नही सिख धर्म का लक्ष्य जरूरतमंद की सेवा करना है सख्त मेहनत करना परमात्मा की उपमा करना अधिक को बांट के खाना है चडदीकला में जीवन जीना है यह तभी होगा जब दढिता(determination) देख मौत भी डरने लगे गुरु तेग बहादुर जी और उस के तीन साथियों भाई मतिदास भाई सतिदास और भाई दियाला जी को तस्वीरों में देखे मौत का कोई भय ही नही लकड़ी की तरह चिरा जा रहा है पानी में उबाला जा रहा है जीवित को रूई में लपेट कर गुरु जी के सामने आग लगाई जा रही है ताकि गुरू जी इस्लाम को धारण कर लें अगले दिन गुरु जी का सिर कलम कर दिया गया किसी ने भी सि तक नहीं किया यहां भक्ति में शक्ति का जलवा हजारों लोगो के सामने हुआ औरगजेब गुरु जी को करामात दिखाने के लिए बोल रहा था गुरु जी ने जवाब दिया हमारा धर्म करामात के विरुद्ध है हम बहादुर हैं आप कायर हो हम से क्यों डर रहे हो जो करना करो ना हिंदू मुसलमान बनेगा न सिख
शहीदी का तुरंत कारण कश्मीरी पंडितों पर भारी जुल्म इस्लाम कबूल करे वरना अगले छः महीने में मरने के लिए त्यार रहें पंडित किरपाल दास जो इन का मुख्य था उस ने इधर उधर सभी देवी देवताओं से प्रार्थना अर्चना की लेकिन कोई रास्ता न बना अंत में वह 1675 ईसवी को गुरु जी के पास एक बड़ा जथा लेकर पहुंचा गुरु जी ने बोला जाओ अपने कश्मीर के सूबेदार को बोल दो अगर सिखो के गुरु तेगबहादुर इसलाम कबूल कर लेते है तो हम सब ऑटोमैटिक मुस्लिम हो जायेगे औरंजेब ने सोचा यह तो बहुत आसान हो गया गुरु जी हमारे सामने क्या चीज है उस को क्या पता था दृढ़ता और कुर्बानी में कितनी शक्ति और भाग्य होता है जो काम तलवार नही कर सकी वह गुरु जी ने केवल कुर्बानी से कर दिया आज औरंगजेब की समाधि पर कबूतर बीठे मार रहें हैं सिख धर्म चमक रहा है अहंकारी बादशाह जिस ने अपने भाईयो को मरवा कर अपने पुत्री पुत्रो को जेल में रख कर राज खड़ा कर रखा हो बाद में सिखों ने ने 1773 ईसवी में मुगलों से दिल्ली का तख्त छीन लिया लेकिन अधिक समय टीक ना सका का कारण हिंदू एकता की कमी थी इतिहास पढ़ने से पता चलता है हिंदू राजे कभी भी एकता नही बना सके आज भी यही हाल है मोदी जी ने ट्राई कर के देख लिया है धार्मिक एकता धर्म पर गर्व होने से बनती है वोट से नही साधु संत कोई ऐसा अमृत त्यार करे जो मनोविज्ञानिक तौर से लड़ मरने की इच्छा बनाए जैसे गुरु गोबिंद जी ने अमृत पान करा कर चिडियो से शेर बना दिए सवा लाख से एक लड़ा दिया आगे चल कर शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह ने मुगलों पठानों को ऐसी मार मारी आजतक मुगल पठान बेगम अपने बच्चो को हरी सिंह नलवा के नाम से नलवा आ गया से चुप करवाती हैं कोई भी हिंदुस्तान पर पश्चिम से हमला नही कर सका केवल भगति से काम नहीं चल सकता परमात्मा का नाम भी तभी जप सकते हैं जब घर देश में शांति हो गुरु नानक जी ने तो बाबर को जाबर कुता बोल दिया था किसी हथियार की जरूरत नहीं पड़ी यह भक्ति की शक्ति थी गुरु अर्जुन देव ने अपनी शहादत पवित्र ग्रंथ ,गुरु ग्रंथ साहिब को बचाने के लिए देदी औरंगजेब ने धीरे धीरे परख की पहले उस ने यह कह कर की मंदिर की बिल्डिंग पुरानी हैं इसलिए इन को ताले लगा दो जब कोई reaction नहीं हुआ तो कहा इन को गिरा दो उन की जगह मस्जिद बनानी शुरू करदी conclusion यह है की कुर्बानी के बिना धर्म के मसले हल नहीं होते पुत्रो का निओंदा देना होता है आज हम धर्म को वोट के लिए इस्तेमाल कर रहे गलत है धर्म के बिना आदमी गीदड़ बन जाता है इसी लिए आज भी फौज की पलटन धर्म के आधार पर शुद्ध गर्व करती हैं






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