गांव, पृथ्वी के मालिक villages are owners 9f the earth india
गांव पृथ्वी के मालिक
सचाई यह है पांच सौ साल पहले कोई शहर नही होते थे केवल गांव ही पुरी दुनिया में होते थे शहर का आगमन रेलवे स्टेशनों और कारखानों से हुआ आप देख सकते हो जहां रेलवे स्टेशन वही शहर है प्राचीन काल में सफ्ताह में बाजार मंडी लगाते थे समान वस्तुयो का आपस में बदल करते थे पैसे का कोई लेन देन नही था गांववासी अपने अपने गांव के प्राकृतिक मालिक थे आज भी गांव ही गांव की जमीन के मालिक हैं जमीन ही उन का माइ बाप है भगवान ईश्वर है आज शहर गांवो के आगे हाथ जोड़ते हैं हमे जमीन चाहिए कारण जमीन के बिना उद्योगपति किसी काम के नही किसानों ने अपने गांव की जमीन को बचाने के लिए बहुत कुर्बानीये दी तभी 2013 में कांग्रेस सरकार ने land Acquisition act अर्थात अभी जमीन को सरकार जबरदस्ती से नही छीन सकती किसी सार्वजनिक या देश के हित के लिए ही जमीन मुश्किल शर्तो के आधार पर खरीद कर सकती है शहर में अर्थात मुंस्सीपल कमेटी नगर निगम में आने वाली जमीन का बाजारी दो गुणा मूल्य देना होगा अर्थात अगर वहां के एक एकड़ का सरकारी मूल्य पहले से ही 1 करोड़ है तो उस का दो करोड़ देना होगा,ऐसे ही गांव अर्थात जो सड़क बनाने के लिए देहाती इलाके से गुजरेगी चार गुणा देना होगा अर्थात उस गांव के एक एकड़ का सरकारी मूल्य अगर 25 लाख है तो एक करोड़ देना होगा इन खेतो पर जो गरीब घर बनाए बैठा था उस को अलग से बसाना होगा मालिक को रहने के लिए प्लॉट भी देना होगा इस कानून को तोड़ने के लिए बीजेपी ने सब कुछ कर के देख लिया लेकिन किसानों ने अपनी कुर्बानी देकर अपने गांव देश को बचा लिया मोदी जी ने काले कानूनों को वापिस ले लिया 7सौ किसानों की जान चली गई बड़े उद्योगपति अपने बहु बेटो का राज स्थापित करना चाहते हैं अभी किसान ही देश के मालिक हैं क्यों की नेता वोट से डरते हैं अभी उद्योगपति की मदद से औरतो से वोट खरीदने का नया रास्ता निकल रहा है इस को गांव वाले समझ चुके हैं और उद्योगपति भी समझ चुके हैं अभी बुधु बनाना मुश्किल है जय जवान जय किसान।






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