सविधान vs पवित्र ग्रंथ constitution VS Holy book


 सविधान vs धार्मिक पवित्र ग्रंथ

सैंकड़ो सालो से हमारे देश में सब धर्मों के पवित्र ग्रंथ ऊंच नीच रंग भेद को मिटाने के लिए शिक्षा और मानवता का संदेश  दे रहे थे आज भी दे रहें हैं भक्ति आंदोलन हुए लेकिन किसी ने  समानता को नहीं माना अपनी अपनी डफली अपना अपना राग जारी रखा हमारे चार वेद भी सही जीवन की कला सिखाते रहे हैं लेकिन भेद भाव कोई छोड़ने को राजी नहीं हुआ प्राचीन काल कलयुग में स्कूल कॉलेज भी समानता का पाठ पढ़ा रहे थे 1526 में हमारे देश में 360 रियासत थी अर्थ जिस की लाठी उस की भैंस सब के लिए कोई सांझा नियम नही था ना ही कोई मानने को त्यार था ईश्वर का धन्यवाद की अंग्रेजो ने हमारे देश को इकठ्ठा किया  एक नियम में सारे देश को रहना सिखाया 1904 में हमारे पूरे देश में रेलगाड़ी चलने लगी थी1860 से ही देश आधुनिक बनने लगा लेकिन यह आजादी नहीं थी आजादी तब थी अगर अंग्रेज एक सविधान बना कर सब को मौलिक अधिकार देते अपने उपर भी कानून वही लागू करते जो हिंदुस्तानयो पर लागू था ऐसा नहीं था जो इंग्लैंड का फौजी भारत में था उस को महीने में चार बार तनखाह मिलती लेकिन भारतीय फौजी को महीने में एक बार जब सविधान न हो तो ऐसा ही होता है

            अंग्रेजो के जाने के बाद हमारा संविधान 26जनवरी 1950 को लागु हुआ इस को बनाने में 2साल11महीने 18दिन लगे इस का सरल अर्थ समानता  और कानून का राज अर्थ सब कानून से छोटे चाहे राष्ट्रपति हो चाहे प्रधानमंत्री हो दुनियां के 95%देशों में कानून का राज है इसीलिए अमरीका जैसा मुल्ख दुनिया  में सब से आगे है यह 1785में आजाद हुआ हर चार साल बाद राष्ट्रपति का चुनाव होता आ रहा है जो अच्छा लगे लोग उस को वोट डालते हैं हारने वाला घर चला जाता है ऐसे ही सविधान से हमारे मुल्ख ने उन्नति की है आज आप गांव शहर में जाकर देखो  1947 के बाद ST,SC aur OBC ने कितनी उन्नति की है उन के पास भी सुन्दर घर नौकरी  वस्त्र पढ़ाई पहुंच गईं है सिर्फ और सिर्फ सविधान में सब को समानता के अधिकार से जात पात का जहर सब मिट रहा है मेरे घर के सामने baalmiki माजरी है हम उन के हर प्रोग्राम में हिस्सा लेते है गांव का रिश्ता चाचा ताया बहु बेटी बोलते हैं इतनी भरी तब्दीली देखी है वरना हमारे धर्म ग्रंथ कब से समझा रहे थे 1967में मैने जात पात देखा एक नौकर को मालिक एक फुट ऊपर से रोटी फेंकते थे कारण अछुत है वास्तविक कारण गंदे पहरावे के कारण था किसी भी जाति में कोई भाई गंदा रहेगा तो उस के साथ कोई खाना नही खायेगा वह साफ सुथरा तभी बनेगा जब सरकार गरीबी  दूर करे 1972 से 1978 तक हमारी खेती ट्यूवेल हरिजन परिवारों के साथ सांझा था बुजर्गो को बाबा बोलते थे आज हमारा विवाह शादियों पर जाना आना है  में इन बुजुर्गों को फौज में याद करता रहा वह हमे अपने बच्चे समझते थे मेरी मां जी बुजुर्गों को चाचा बोल कर पुकारती थी यह बहुमूल्य संस्कार जो मुझे फौज में भी काम आए नफरत तो खुद को ही खत्म करती है इस का क्या अर्थ सविधान ना हो तो जिस की लाठी उस की भैंस    क्यों की धार्मिक ग्रंथों की बात तो ये लोग मानते नही संविधान का ही चमत्कार हुआ है

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