माता पिता vs औलाद
माता पिता vs औलाद
सचाई तो यह है की मां बाप के जाने के बाद ही उन की कृपा उन के आशीर्वाद उन की कुर्बानी का पता चलता है 1985 की बात है अचानक से मेरा एक फौजी अधिकारी मुझे बोलता है की गाड़ी को देवलाली शहर के कब्रस्थान की और टर्न करो कब्र स्थान में वह अपनी माता जी की कब्र पर फूलो की माला भेंट करने के बाद इमोशनल हो गया रोने लगा कुछ दुरी से मैने उसे देख मुझे मेरी मां याद आ गई फिर सोचा की मेरी मां तो जीवित है गाड़ी में वापसी पर अधिकारी बोलने लगे मेरी मां ने मुझे अफसर बनाया मेरी मां ने मुझे पढ़ाया लिखाया कहने लगे अभी मेरा मां की सेवा करने का मौका था मां जी चले गए पास में मैने बोला sir मां का कोई कर्ज नही उतार सकता ये सब बाते हैं सेवा कर के तो आप का ही भाग्य चमकना था मां तो देना ही जानती है लेना नही जानती पता चला वास्तव में वह अधिकारी अपनी माता जी को कोर्स के दौरान भी साथ रखे बैठा था जब की ऐसी कठिन फौजी अवस्था में तो अपने मां बाप भी भुल जाते हैं एक पुत्र था बहन भी नही थी सिर पर पिता जी भी नही थे ताआ चाचा बुआ भी नही जब मां बाप में से एक साथी चला जाता है दुसरे साथी के लिए पीछे धक्के ही रह जाते हैं रिश्तो के बिना पैसा किसे काम नही मां अपने पुत्र को देख कमी को पूरा करने की कोशिश करती है अगर उस की बहु नेक इंसान है वरना उस माता की वो दुर्दशा हो जाती है जिस का कोई अनुमान न हो फौजी की अपेक्षा किसान की माता अधिक खुश रहती है घर गांव में चहल पहल रहती है फौज में बहुत मुश्किल एक जगह कही रहना नही विदेशों में तो बच्चे एक जगह fix हो जाते हैं माता पिता का आना जाना आसान होता है फौजी आर्थिक तौर से भी पिता की कमी को पूरा नहीं कर सकता
ऐसा ही एक उदहारण उपर तस्वीर में मेरे खुद के मां बाप हैं जो अभी दुनिया में नही है मुझे बहुत पछतावा है मैं अपने मां बाप की फौजी नौकरी के दौरान कोई सेवा नही कर सका चार भाईयो में हम तीन भाई फौज में शुक्र भगवान का एक भाई किसान था एक बार मेरी मां जी ने घटना सुनाई बोलने लगी मिलिट्री हस्पताल में डॉक्टर बोलने लगे माता जी आप का ऑपरेशन करना पड़ेगा खून चाहिए माता जी ने बड़े फक्र से कहा मेरे तीन लड़के फौज में हैं तीनों दुर है मैं बेबस हूं डॉक्टर तरुनत राजी हो गए मेरी मां मरने से पहले मुझे फोन पर बोली की तुम्हारे मिलिट्री हस्पतालो ने मेरी कई बार जान बचाई है मैने सोचा मां क्या कह रही मां का कर्ज कोई पुत्र नहीं उतार सकता मैने कहा मां जान तो डॉक्टरों ने बचाई बोलती क्यों हम ने नौकरी नहीं की,फिर भी मां पुत्रो का ही पक्ष कर रही थी हमे मां की यह इकलौती फौजी शाबास आज हमे जीवित रखे बैठी है मेरी माता जी पिता जी को सुझाव देती मेरा शरीर साथ नही दे रहा मैं पहले मर सकती हु आप की चार बहुएं है आप को रोटी मिलेगी चार पुत्र हैं आप ठीक timetable से बच्चो के घर जा कर खा लेना दारू आदि नही पीना हुआ उलट पिता जी मां से 6साल पहले चल बसे माता जी बहुत hardworker थे आखिर वक्त 80साल की उम्र तक माता जी ने अपने हाथ से खाना बनाया पिता जी को खिलाया परिवार की रजामंदी से सुपर सीनियर सिटीजन होने के बाद भी अपने पैतृक घर की साफ सफाई खुद करते थे है हर मौत के पीछे घर वालो को राजी रखने के लिए कुछ बहाना बनाना होता है खांसी के कारण हॉस्पिटल दाखिल हुए 23 Feb 2021 मैं, मेरी पत्नी माता जी को मिले मुस्करा कर बोलने लगी मैं खुश हूं अभी में मरना चाहती हू यह सुन कर हम हैरान माता जी क्या कह रहें हैं सच हुआ कारण माता जी को अपने अंत समय का पता चल गया था माता जी ने दुनिया देखी थी।

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