आस्था या श्रद्धा
आस्था या श्रद्धा एक प्राकृतिक शक्ति होती है यह इंसान के खुद के तुजरब्बे से पैदा होती है जिस काम या इंसान के प्रति यह जाग जाती है फिर समझो उस को न सर्दी ना गर्मी ना थकावट होती है बल्कि रोटी का भी ध्यान नहीं रहता आप अंदाजा लगा सकते हो जिन को धर्म में आस्था होती है वह सुबह उठ कर भागे फिरते है जिन को पढ़ाई लिखाई में आस्था है वह बड़े से बड़े नौकरी के competition जीत जाते है जिन को काम में आस्था होती है वह भाग्यशाली होते हैं पूरी उम्र काम करते है और शरीरक तौर पर मजबुत होते हैं जिन को प्यार में आस्था होती है वह कभी झगड़ा नहीं करते पति पत्नी की एक दूसरे प्रति आस्था इस कदर बड़ जाती है की वह बुड़ापे में अकेले नहीं रह सकते चाहे उन को करोड़ों रुपए देदो वह एक दुसरे को देखे बिना नहीं रह सकते इस उम्र में मौह माया में आस्था ना के बराबर होती है आस्था एक अक्सीजन जैसे होती है अक्सीजन हवा में होती है हमे जीवित रखती है आस्था शरीर मन में होती है जिस से भरोसा बढ़ता है सादगी में रहने से श्रद्धा आस्था भरोसा तीनों बढ़ते हैं सादगी में काम के प्रति श्रद्धा अधिक बढ़ती है सादा जीवन उच्च विचार दिखावा घमंडी बनाता है कुदरत को नहीं जानता देवी शक्ति को नहीं जानता जो शरीर के अंदर होती है हमे केवल जगाने की आवश्कता होती है यह स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी में नही मिलती तुजर्बे में होती है work perfect a man,

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