मौर्चा Trenches





 मोर्चाबंदी  जान सलामती 

महायुद्ध 1915 -  1919

महायुद्ध  1945-  1949


पृथ्वी ही खाने को देती है पृथ्वी ही हमारी जान बचाती है  कितनी ही भयंकर गोली बम हो पृथ्वी को नहीं भेद सकता जान बचाने का सस्ता और आसान तरीका खडा या मार्च बना लो आप की जान बच जाएगी मोर्चे में बैठ आप दुश्मन का मुकाबला कर सकते हो अपने गोले बारूद को बचा सकते हो  अपने आप को छुपा सकते हो  दुश्मन को धोखा दे कर पकड़ सकते हो  लड़ाई लड़ने के लिया दो लाइन बनाई जाती है फ्रंट लाइन और सेकंड लाइन  दोनो लाइन में आप को मोर्चे की आवश्यकता होती है अगर फ्रंट लाइन टूट जाती है तो आप सेकंड लाइन से अपने देश की रक्षा कर सकते हो यह पैदल सेना का काम होता है कब्जा होने से रोकना आप हवा में जितना मर्जी बहादुर हो लेकिन अगर आप के देश की जमीन पर दुश्मन का कब्जा हो गया तो आप हार जाओगे दोनो महायुद्ध में हर गांव शहर में मोर्चे ही आप के हथियार थे आप को खड़े में बैठने की आदत है तो आप लड़ाई में बच सकते हो और अपने देश की रक्षा कर सकते हो हवा की लड़ाई जमीनी लड़ाई की मदद के लिए होती है हवा की लड़ाई का मकसद दुश्मन को आर्थिक नुकसान पहुंचाना होता है आर्थिक तौर पर कमजोर करना परंतु अगर देश पर कब्जा हो जाए तो आप गुलाम बन जाएंगे फिर महल मुनारे कारो हवाई जहाजों की जगह आप को पशु दे दिए जाएंगे सीमाओं की रक्षा के लिए बहादुर नेता और फौज का होना जरूरी होता है नेता जिसे कुर्सी का लोभ लालच न हो उसी से उम्मीद होती है

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