Reality
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VS
ईरान का same IQ ( अकलमंदी 2026)
समानताएं
1 बाबर का देश अफगानिस्तान ओर धर्म इस्लाम मुस्लिम था और ईरान देश भी शिया मुस्लिम है
2 बाबर ने भारत में अपने तौपखाने का सही प्रयोग सही मौके पर किया जो की दुश्मन के लिए अनोखा था दुश्मन तौपखाने बारे बेखबर था हिंदुस्तान में तौपखाने की शुरुवात बाबर ने ही की थी इसी प्रकार ईरान की मिसालो का प्रयोग अनोखा है सही मौके पर है
3 बाबर की प्रदेसी फौज केवल 10 हजार जब की दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोधी दुश्मन की फौज 1 लाख थी जिस में घुड़सवार की संख्या 1000 थी इसी प्रकार ईरान के सामने अमरीका इजराइल और अरब देश की ताकत ईरान से 10 गुणा हैं पिछले 21 दिन से ईरान अकेला लड़ रहा है अकल मंदी का उधारण
4 बाबर पानीपत का युद्ध धर्म के नाम लड़ा इसी प्रकार ईरान भी ईरान की फौज IRGC इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड है जो इस्लाम के नाम लड़ रही है
5 बाबर की लड़ाई की विधि विज्ञानिक थी जब की दुश्मन की विधि पुरानी प्रमरागत रूढ़िवादी थी बाबर के तौपखाने की आवाज गर्ज से हाथी घोड़े डर गए वह पीछे भागे उन्होंने अपनी फौज को ही कुचल दिया इसी प्रकार ईरान ने लड़ाकू विमानों की अपेक्षा मिसालो की विज्ञानिक accuracy को चुना निशाना सही हो आग तो एक माचिस की तीली जंगल को जला देती है
6 बाबर पानीपत के मैदान में घेरा डालने वाली विधि से लड़ा जब की दुश्मन सीधा जैसे बारात चलती है इसी प्रकार ईरान ने अपनी मिसालो को घेरा विधि से पहाड़ों में छुपा रखा है मिसाल सिटी बना रखे हैं
7 लड़ाई में जरनैल या राजे का मरना फौज का हौंसला गिराता है लेकिन अमरीका इजराइल ने ईरान के जर्नल संत या राजे खमनेई को बिना लड़ाई के और धोखे से मार कर लड़ाई से पहले अपराध किया है जिस से जनमत विरोध में है दुसरी तरफ ईरान जानी नुकसान को हेमियत नही देता हमले से पहले वह लोगो को जगह छोड़ने की सलाह देता है
8 बाबर की लड़ाई में जीत का सब से बड़ा कारण बाबर को लड़ाई के मैदान में 7दिन का समय मिल गया तब तक बाबर ने अपनी मजबूती को बड़ा लिया उस ने मैदान के बाहर की साइड बड़ी बड़ी खाई खोद कर ऊपर से पतो से ढक दिया ताकि हाथी उस में धोखा खा कर गिर जाए गांवो से 700 बैलगाड़ी इकठी कर ली जिन को आपस में horigentle बांध कर दुश्मन के आगे बड़ने में रुकावट खड़ी की जाए दुसरी तरफ लोधी को अपनी एक लाख फौज पर घमंड जैसे अमरीका को है बदले में ईरान को काफी समय मिल चुका है अपने equipment को सही जगह रखने में
9 मुगल अफगान पठान गुरिल्ला युद्ध में माहिर होते हैं जब की इंग्लैंड रूस अमेरिका समय समय पर गुरिल्ला युद्ध से मुंह मोड़ चुके है 20साल तक इन तीनो ने अफगानिस्तान में तालिबान के विरुद्ध अजमा कर देख लिया है ईरान ने इसी अपनी परम्परा को आगे बड़ा समुंद्र का रास्ता बंद कर रखा है यहां वह गुरिल्ला युद्ध से कई महीनो लड़ सकता है भुगोलिक स्थिती पहाड़ ईरान के पक्ष में हैं
10 पानीपत की लड़ाई की जीत ने बाबर को हिंदुस्तान का मुगल बादशाह बना दिया था 300 साल तक मुगलों का राज रहा ईरान की लम्बी लड़ाई लगने से तेल गैस की सप्लाई ठप से लड़ाई फिर बैल घोड़े हाथी पशुओं की याद ताजा होगी लेकिन ईरान अकलमंद है ट्रंप खुद इस की पुष्टि कर चुका है ऐसा नहीं होगा

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