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दिसंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गांव, पृथ्वी के मालिक villages are owners 9f the earth india

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 गांव पृथ्वी के मालिक सचाई यह है पांच सौ साल पहले कोई शहर नही होते थे केवल गांव ही पुरी दुनिया में होते थे शहर का आगमन रेलवे स्टेशनों और कारखानों से हुआ आप देख सकते हो जहां रेलवे स्टेशन वही शहर है प्राचीन काल में सफ्ताह में बाजार मंडी लगाते थे समान वस्तुयो का आपस में बदल करते थे पैसे का कोई लेन देन नही था गांववासी  अपने अपने गांव के प्राकृतिक मालिक थे आज भी गांव ही गांव की जमीन के मालिक हैं जमीन ही उन का माइ बाप है  भगवान ईश्वर है आज शहर गांवो के आगे हाथ जोड़ते हैं हमे जमीन चाहिए कारण जमीन के बिना उद्योगपति किसी काम के नही  किसानों ने अपने गांव की जमीन को बचाने के लिए बहुत कुर्बानीये दी तभी 2013 में कांग्रेस सरकार ने land Acquisition act अर्थात अभी जमीन को सरकार जबरदस्ती से नही छीन सकती किसी सार्वजनिक या देश के हित के लिए ही जमीन मुश्किल शर्तो के आधार पर खरीद कर सकती है शहर में अर्थात  मुंस्सीपल कमेटी नगर निगम  में आने वाली जमीन का बाजारी दो गुणा मूल्य देना होगा अर्थात अगर वहां के एक एकड़ का सरकारी मूल्य पहले से ही 1 करोड़ है तो उस का दो करोड़ देना होगा,ऐसे...

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सविधान vs पवित्र ग्रंथ constitution VS Holy book

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 सविधान vs धार्मिक पवित्र ग्रंथ सैंकड़ो सालो से हमारे देश में सब धर्मों के पवित्र ग्रंथ ऊंच नीच रंग भेद को मिटाने के लिए शिक्षा और मानवता का संदेश  दे रहे थे आज भी दे रहें हैं भक्ति आंदोलन हुए लेकिन किसी ने  समानता को नहीं माना अपनी अपनी डफली अपना अपना राग जारी रखा हमारे चार वेद भी सही जीवन की कला सिखाते रहे हैं लेकिन भेद भाव कोई छोड़ने को राजी नहीं हुआ प्राचीन काल कलयुग में स्कूल कॉलेज भी समानता का पाठ पढ़ा रहे थे 1526 में हमारे देश में 360 रियासत थी अर्थ जिस की लाठी उस की भैंस सब के लिए कोई सांझा नियम नही था ना ही कोई मानने को त्यार था ईश्वर का धन्यवाद की अंग्रेजो ने हमारे देश को इकठ्ठा किया  एक नियम में सारे देश को रहना सिखाया 1904 में हमारे पूरे देश में रेलगाड़ी चलने लगी थी1860 से ही देश आधुनिक बनने लगा लेकिन यह आजादी नहीं थी आजादी तब थी अगर अंग्रेज एक सविधान बना कर सब को मौलिक अधिकार देते अपने उपर भी कानून वही लागू करते जो हिंदुस्तानयो पर लागू था ऐसा नहीं था जो इंग्लैंड का फौजी भारत में था उस को महीने में चार बार तनखाह मिलती लेकिन भारतीय फौजी को महीने में एक बार...

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माता पिता vs औलाद

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 माता पिता vs औलाद  सचाई तो यह है की मां बाप के जाने के बाद ही उन की कृपा उन के आशीर्वाद उन की कुर्बानी का पता चलता है 1985 की बात है अचानक से मेरा एक फौजी अधिकारी मुझे बोलता है की गाड़ी को देवलाली शहर के कब्रस्थान की और टर्न करो कब्र स्थान में वह अपनी माता जी की कब्र पर फूलो की माला भेंट करने के बाद इमोशनल हो गया रोने लगा कुछ दुरी से मैने उसे देख मुझे मेरी मां याद आ गई फिर सोचा की मेरी मां तो जीवित है गाड़ी में वापसी पर अधिकारी बोलने लगे मेरी मां ने मुझे अफसर बनाया मेरी मां ने मुझे पढ़ाया लिखाया कहने लगे अभी मेरा मां की सेवा करने का मौका था मां जी चले गए पास में मैने बोला sir मां का कोई कर्ज नही उतार सकता ये सब बाते हैं सेवा कर के तो आप का ही भाग्य चमकना था मां तो देना ही जानती है लेना नही जानती पता चला वास्तव में वह अधिकारी अपनी माता जी को कोर्स के दौरान भी साथ रखे बैठा था जब की ऐसी कठिन फौजी अवस्था में तो अपने मां बाप भी भुल जाते हैं एक पुत्र था बहन भी नही थी सिर पर पिता जी भी नही थे ताआ चाचा बुआ भी नही जब मां बाप में से एक साथी चला जाता है दुसरे साथी के लिए पीछे धक्के ही र...

नया पुराना साल मन का शोर

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 नया पुराना साल मन का शोर नया साल तभी सही बैठेगा अगर हम पुराने सालो में होने वाली गलतियां फिर नए साल में ना दोहराए और नए साल के हर कार्य को योजना बना कर अपने बजट अनुसार पालन करें कच्चे काम के नतीजे अर्थात अपना होम वर्क किए बैगार कोई भी काम शुरू करोगे तो नए साल की क्या गलती होगी परमात्मा तो किसे के रास्ते नही रोकता बल्कि वह तो हम सब की मुफ्त में मदद करता है मानसिक तौर पर कमजोर व्यक्ति इस भ्रम में फस जाता है और अच्छा मौका हाथ से निकल जाता है वस्तु कला भी आप को आलसी और भ्रमवादी बनाती है घर दुकान का मुंह इधर होना चाहिए उधर होना चाहिए  सही बात यह है की आप की दुकान आबादी में होनी चाहिए और आप का व्यवहार ठीक होना चाहिए मेहनत तो आसमान में सितारों को छुने जाती है हमारे घर से मिले अच्छे संस्कार हमारे रक्षक होते हैं ना की नया साल हमारा स्वभाव हमारी कमाई होता है आदमी उत्साहित है जब वह Timetable योजना  बना कर कार्य आरम्भ  करता है शुरुवात अच्छी होती है इसी अच्छी शुरुवात को  हम साल के पहले दिन से करे साल अच्छा ही होगा सुस्त शुरुवात Demorale करती है मुहर्त सावधानियों को ही कहते ...

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Home घर

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कार्य और मंनोरंजन entertainment wn work

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 कार्य और मनोरंजन Two - in - one  जितने ये लोग खुश देखे जा सकते हैं उतने अदानी अंबानी भी खुश नही देखोगे कारण शरीरक तौर से काम करने से जो खुशी मिलती है वह आप का एक प्राकृतिक आनन्द होता है कहने के लिए दुकान दफ्तर चलाना भी कार्य होता है उस में केवल मन खुश होता है इस में दोनो मन और शरीर खुश रहते हैं मेले में लोग क्यों खुश होते है वहां लोगो की चहल पहल होती है ऐसा ही दृश्य मनेरगा स्कीम जो प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने चलाई थी वह किसी को मुफ्त में पैसा नही बांटना चाहते थे इस स्कीम के दौरान गरीब लोगो को हर साल 100 दिन का काम दिया गया जो उन के गांव के चारो तरफ तालाब सड़क बाग आदि में करना होता है 370/रूपए एक मजदूर को प्रतिदिन मिलते हैं साथ में फ्री का मनोरंजन आपसी live सुचनाए अपने गावों सबंधित प्राप्त होती हैं ये लोग स्वस्थ देखे जाते हैं दुख की बात है सरकारे इस पैसे को काम की बजाए वोट के बदले काम बंद कर रही हैं पहले औरतो को झुठे बाबे संतो फकीरों ने लुटा अभी सरकार इन का  शोषण कर रही है झुठी सकीमो राशन के के नाम वोट को  खरीदा जा रहा है ये अनपढ़ औरते नही जानती लोकतंत्र क्या होता ह...

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Culture संस्कृति

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 संस्कृति और स्वस्थ कहावत है हर 100 miles के बाद पानी और भाषा बदल जाती है जिस से वहां की संस्कृति भी प्रभावित होती है हमारे देश में जितने भी राज्य हैं उतनी ही अलग अलग बोलियां भाषाएं निर्त्य वेश भूषा  खान पान अर्थात पहरावा आदि सब अलग हैं तब भी हमारे देश में विभीनता में एकता पाई जाती है हमारा देश आपसी भाईचारे का देश है यहां की संस्कृति संसार में सब से अमीर संस्कृति है कारण लोगो की रुचि सामाजिक और आध्यात्मिक है जिस से संतुष्टि उपजती है जैसा मन तैसा तन अर्थात मन तो हसने खेलने नाचने गाने से खुश रहता है यहां के लोग हर खुशी को नाच गा कर मनोरंजन करते हैं जो पुरष स्त्री लम्बी उम्र के बाद मरते है उन के मरने पर भी नाच गाना बड़े बड़े खाने परोसे जाते हैं मरने पर भी लाखो रुपए खर्च किया जाता है उस का सब से बड़ा लाभ सब रिश्तेदार इकठे होते है जिस से प्यार मुहब्बत बढ़ती है लंबी उम्र जीने का राज खुश रहना है  यह हमे अपनी संस्कृति से मिलती है पैसा लेन देन के लिए होता है खुशी के लिए नही खुशी आप को संगीत डांस और अन्य मनोरंजन से मिलेगी आप शादी पर करोड़ों रुपए लगा दो अगर वहां बैंड ,DJ डोल और संस्...

Unity एकता

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Milkha Singh and inspiration

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 मिल्खा सिंह और प्रेरणा दुनिया में आना जाना बना हुआ है यह किसी को पता नहीं  आने के बाद उसे कोई ऐसा कर्म करने को मिले न मिले जिस से उस के देश की इज्जत बड़े अपनी इज्जत अपना Name and Fame के लिए हर आदमी उत्सक होता है होना भी चाहिए जहां मां बाप अमीर हो पैतृक धंधे से बच्चे पैतृक सब कुछ देखने से ही सिख जाते है कोचिग में भेजने की जरूरत नहीं होती लेकिन मिल्खा सिंह के साथ सब कुछ उल्टा हुआ 1947 के दंगो में मिल्खा सिंह के मां बाप और सात भाई बहनों को मार दिया गया जो मिल्खा सिंह ने अपनी आंखो से देखा था उस समय वह17 साल के थे लेकिन मिल्खा सिंह के पिता ने मरने से  मिल्खा सिंह को भाग मिल्खा बोला  इन शब्दों पर बाद में ;भाग मिल्खा सिंह; फिल्म भी बनी  भारत आने पर मिल्खा सिंह अनाथ हो गया रेलवे स्टेशन पर जूते आदि पॉलिश कर अपना गुजारा करने लगा कुछ दिनों बाद उसे पता चला उस की चचेरी बहन दिल्ली में है वह यहां आ गया  गरीबी के कारण यहां भी बहुत धक्के खाए  सिख समुदाय का एक ही पेशा होता था फौज में भर्ती होना आजकल इन का पेशा विदेशी बन चुका है लेकिन फौज में भी मिल्खा सिंह को भर्ती...

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गांव अच्छा या शहर अच्छा

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गांव अच्छा या शहर अच्छा  अपनी जन्मभुमि अपने बचपन के गांव शहर को कोई भी बुरा नही बोलेगा चाहे वह पिछड़ा हो या आधुनिक हो सब प्यार करते हैं कारण अपनी मिटी से मोह होता है यह उन की आत्मा  में बसा होता है परंतु अगर आज आप उत्तर भारत के गांवो में खासकर के पंजाब हरियाणा हिमाचल पश्चिम उत्तरप्रदेश आदि गांवों को देख मन नाचने लगता है बडी बडी कोठियों साफ सफाई खुले आंगन शांति अच्छी पढ़ाई के लिए बसें सड़को पर शानदार पैलेस अपने गांव के बाजार,मंदिर गुरुद्वारे चर्च मस्जिद आपसी भाईचारक सांझ आदि  कुदरत का रूप दिखने लगता है दिल्ली जैसे शहर प्रदूषण से भरे पड़े हैं जो देश की राजधानी भी है कोई कुछ नही कर पा रहा है बड़े बड़े मंत्री भी यही बैठे हैं कारण कुदरत के नियमो के विरुद्ध इतनी भीड़ इकट्ठी रखना ताकि वोट बैंक बना रहे आज छोटे बड़े शहर में गंदगी प्रदूषण  शोर आदि सब में देखने को मिलता है गांव में नाम मात्र हो सकता है क्रोना में बड़े शहर में मौत अधिक हुई कारण पहले से प्रदूषण ने फेफड़े कमजोर कर रखे थे जल्दी मौत हो गई अधिकतर पैसा गांव में ही होता है गांव वालो के पास जमीन होती है जो सब कुछ खाने क...

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