नया घर नई शादी
नया घर और नई शादी
नया घर नई शादी का नजारा कुछ अलग होता है
घर चाहे कितने भी पैतृक हो जैसे घर की मुर्गी दाल बराबर 700 रुपए का मुर्गा बाहर से खरीदा हुआ आप को अधिक टेस्ट महसुस होगा लेकिन घर का स्वस्थ निरोग मुर्गा दाल का ही टेस्ट महसुस होगा कारण इस पर पैसा खर्च नही हुआ जिस वस्तु पर पैसा खर्च होता है वह पसन्द भी आता है और और इस के पीछे हम भागे भागे फिरते है और सम्भाल भी अधिक करते है क्यों की घर जिंदगी में एक बार ही बनते है कई वर्षो तक हमे बैंक की किश्त चुकानी पड़ती है वरना पैतृक जयदात को बेच कर एकमुश्त घर खरीद सकते हैं फिर उस का क्या फायदा क्यों की आज गांव कई शहरों से बेहतर हैं हर सुविधा आज गांवो में उपलब्ध है गांवो से बच्चे विदेशों में अधिक हैं अधिकतर पैसा गांवो में है हर अच्छे स्कूलों कॉलेजों की बसे गांव आती हैं हर वस्तु door service हैं Amazone flipcard आदि सभी सुविधा गांवो में पहुंच चुकी है दुसरा घर खरीदना नौकरी पैशा बच्चो की मजबुरी होती है service में प्रॉपर्टी खरीदने के सारे फायदे ही होते हैं नुकसान नहीं होता बच्चो को पैसे की बचत करने की आदत पड़ जाती है अमीर बचत की आदत से बनता है पैसे से नही बनता बच्चा तभी अपने पैरो पर होगा जब मां बाप बच्चों को कहे खुद कमाओ खुद बनाओ ऐसे बच्चे अपनी पैतृक जयदात को भी बढ़ाते हैं और लोगो से शोभा भी कमाते हैं काम तो अपना करते हैं प्यार फ्री में कमाते हैं यह बचत की आदत नई शादी से शुरू कर जीवन भर रखनी चाहिए क्यों की फजुल खर्चे घर को बर्बाद कर देते हैं सादा जीवन उच्च विचार सादे लोगो को हर आदमी पसंद करता है दिखावे से आप अपने आप को ही धोखा देते हो दुसरे को नहीं सोचो जमीनें बेच आप कार ले सकते हो लेकिन कार बेच कर आप जमीन घर नही ले सकते आप सोचो आप का दादा अपनी सारी जायदाद अपने पुत्र को पिता फिर आगे पुत्र को फिर पुत्र का भी फर्ज है वह भी अपने पुत्र को दे जमीन घर तो आप को पीढ़ी दर पीढ़ी देते जा रहे हैं आप से कुछ नही लेते इस को पवित्र सोच कहते हैं अपना पैसा जमीन या घर पर ही इन्वेस्ट invest कीजिए शेयर सोना पॉलिसी सब आप का बुधु बनाने के लिए होता है





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