Reality सच्चाई


बिछोडा
    वास्तव में यह सच है  मोबाइल ने बिछोडे के दर्द को  70%  कम कर दिया है वरना मोबाइल के जमाने से पहले यह बिछोडा मौत से भी बुरा होता था असहनीय होता था फौजी  नई शादी में  दुसरी नौकरियों से अधिक पिस्ता था कारण फौज में बार बार छूटी का रिवाज नही होता साल में तीन से अधिक बार छूटी मुश्किल नई शादी के बाद  आप को मां बाप की तरह कोई गारंटी  नहीं देता एक फौजी जीवन के नाते में अपना ही सच बता देता हू मैं दो बेटियों का पिता हूं 1982 में मेरी शादी घर वालो ने जब दो महीने की छुट्टी खत्म होगई तो बोला एक ओर महीना अगले साल का एडवांस मंगवा लो शादी करना है  तीसरे  महीने के 9 दिन रहते शादी हुई टोटल पुरा करने वाला काम हुआ दोनो तरफ मां बाप जानते हुए सारी छूटी घर के कामों में  खर्च  होगई शादी अगले साल भी हो सकती थी  लेकिन कौन जाने पीड पराई वाली कहावत देखो जब बेटी हो जाती है तो बहन बुआ मन से बिसर जाती हैं जब पत्नी आ जाती है तो मां भी दुसरे नंबर पर चली जाती है या स्वाभाविक होता है परंतु अभी अपना जीवन साथी जान से भी प्यारा लगने लगा तब  छूटी खत्म हुई मैं हिम्मत कर  गांव से निकला मेरी पत्नी मेरी mother को बोलने लगी मैं  स्टेशन तक साथ जाती हु मदर बोलने लगी फिर गांव वापिस किस साधन से अकेली आएगी  गांव से स्टेशन तीन किलोमीटर दुर था हम स्टेशन पहुंचे  उस के बाद पत्नी  की उदासी हदअसहनीय होगई मैने bye सब कुछ बोला गाड़ी स्टेशन से कुछ सेकेंड में विधा हो गई  जैसे कैसे मैं दिल्ली पहुंचा मैने असम जाने के लिए नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर ट्रेन में बैठना था मेरी उदासी इतनी  अधिक बड़ गई मेरे कंट्रोल से बाहर हो गई मैं ट्रेन से बाहर आ गया मेरा सामान ट्रेन के अंदर उस वक्त आज जैसे फोन होते तो मैं इतना उदास ना होता आज तक दिल्ली का बेबस सीन याद है ट्रेन की बिसल हुई मैं ट्रेन में बैठ गया बड़ी गलती होने से बच निकला तीन दिन के बाद अपनी पलटन पहुंचा दो महीने के बाद मैने  घर आने के लिए छूटी की प्रार्थना रखी किसी  ने नही सुना मुझे  हुक्म हुआ अगले दो महीने के लिए आप बिस्तर बांधो पोस्ट पर जाओ मैं चला गया जून 1982 में शादी हुई  उस सालNov तक कुछ समझ नही कब मेरी सुनी जाए एक सिपाही थे अगर सच बोलूं मुझे अपनी पत्नी का चेहरा भी भुल चुका था परमात्मा ने  Nov महीने के आखिर में बंदोबस्त बनाया 15 दिन की छूटी में 9 दिन घर रहा  जिस अफसर ने मुझे पोस्ट से छूटी का बंदोबस्त कर के दिया था मैं उस का पुरा वफादार रहा घर से 2दिन पहले निकल गया उस दिन भी मैं दिल पत्थर कर चला गया ऐसा सब प्रदेसी के साथ होता है  सबर का फल मीठा उस के बाद फौज में मैं लम्बा समय  31 साल तक गुजारा 18साल मेरी पत्नी मेरे बच्चे भी मेरे साथ रहे बच्चे फौज में पढ़  कर अफसर बने लेकिन मैंने अपने राज में नए शादी वालो के मजे बना के रखे मैंने ensure किया जो मेरे साथ हुआ वह मेरे जवानों के साथ न हो  और न ही मेरे बेटे बहु के साथ हो बहु बेटे को तो मैने सामने बैठा कर बोला जब तक मै जिंदा हू आप ने इकठ्ठे रहना है और रह रहे हैं हालाकि बेटे की बैंक की नौकरी है प्रदेसी वाली कोई बात नही सिवाल नौकरी में वरना एक औसत के मुताबिक फौज के 100  नए शादी वाले उस समय के जवानों में से 10 ने नौकरी छौड़ दी या भाग गए या बार बार छुट्टी से लेट नौकरी खराब, कइयों को सजा पीठू परेड, बिछोडा फिर वहीं का वहीं आज तो वीडियो कॉल से आप अपना मन परचा सकते हो  समय खुश  नौकरी नहीं छोड़ना चाहिए जीवन बर्बाद हो जाता है पत्नी भी बर्बाद बिछोडे में आनंद भी होता है चाहे चिट्ठी पोस्ट पर एक महीने तक पहुंच करती थी उस चिट्ठी से प्यार ऐसा जैसे जीवन दान मिल चुका हो महायुद्ध1914और 1939 में तो बिछोडा तलाक में बदल गए इन युद्धों में लापता शब्द बहुत प्रचलित हुआ तीन साल तक मां बाप ने नई शादी वाले फौजी का इन्तजार किया उस के बाद अधिकतर मां बाप राजी होगए लड़की की दुसरी शादी कर दो उन में से कुछ फौजी वापिस जीवत घर आ गए आगे देखा उन की पत्नी घर बदल चुकी है मौत से बड़ा झटका होगा बड़ा सदमा भगवान किसी का जीवन साथी को न उजाड़ें पत्नी का बदल नही होता फिर तो जुगाड रह जाता है

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