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यादें memories

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 यादें यादें अमर होती है मरने से पहले और मरने के बाद दोनो समय में काम करती है बुढ़ापे में बचपन की यादें बुजर्ग को जीने का सहारा देती है मरने के बाद उस की यादें दुसरे को प्रेरित करती है यादें ताजा रखती है जवानी की याद आने से इंसान फिर जवान महसूस करता है खट्टी मीठी यादों को याद  कर इंसान अपने बीते समय का मुल्यकण करता है कुछ ऐसी यादें जो पछतावा प्रगट करती है मैने वह ठीक नही किया था  किसी की भलाई मे किए कार्यों की याददस्त अधिक होती है दुखो में गुजरे समय की याद कभी नही भूलती  कुछ यादें  असहनीय होती हैं पति पत्नी की याद बहुत गहरी होती है एक साथी के मरने पर दुसरे साथी का जहान उजड़ जाता है तुजरबे से पता चलता है जब एक साथी चला जाता है तो दुसरा भी अगले 5- 6 साल में चला जाता है इश्क बाजी में अपने प्यारे की यादें शरीर का पिंजर बना देती हैं tomb,  memorial  और तस्वीरे  बड़ी काम की चीजे होती है इंसान के अच्छे कार्य  की यादों को दुनिया में बनाए रखती है देश में महात्मा गांधी डॉक्टर अंबेडकर आदि के सैंकड़ो मेमोरियल स्थल बने हुए है मकसद उन की याद को ताजा रखना च...

चकबंदी मुरब्बेबंदी

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 भुमि की चकबंदी मुर्बबेबंदी 1947 से पहले हिंदुस्तान पाकिस्तान एक ही था इसे ब्रिटिश भारत कहते थे1880 ईसवी के आसपास इतने बड़े देश की आबादी 22करोड़ के आसपास थी लेकिन देश का क्षेत्रफल बहुत बड़ा था अधिकतर भुमि जंगलों से ढकी हुई थी नदियों की संख्या बहुत थी पंजाब में तो पांच बड़ी नदियां सतलुज बियास रावी झेलम और सिंध  समतल इलाको से बहती थी फिर भी अनाज की कमी थी कारण उपजाऊ खेतो की संख्या कम थी गांव के आसपास ही खेती होती थी गांव की दो दिशा में एक साल दुसरी दो दिशा में अगले साल अर्थात एक साल खाली रखने के बाद ताकि भूमि की ताकत इकठ्ठी हो सके पानी के साधन केवल बरसात पर निर्भर थे गोरी सरकार ने इस पर अध्यन किया और कनाडा अमरीका वाला फॉर्मुल चकबंदी मुरब्बेबंदी को पश्चिमी पंजाब के लायलपुरा शेखुपुरा सियालकोट में पुर्ण तौर पर 1920 से शुरू कर दिया गया  इसे बार का इलाका बोला जाता था अंग्रेज सरकार ने पूर्वी पंजाब से पंजाबी किसानों को उत्साहित किया जितना कोई जंगल काट कर उपजाऊ जमीन बनाए वह उसी की होगी नाममात्र मुल्य पर आप जानते हो जमीन या भुमि जट जाट की जान होती है बस फिर क्या था लोगो ने सैंकड़ो ए...

लमरदार,जैलदार जमीदार चौधरी

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 लंबरदार,जैलदार, जमीदार और चौधरी  ब्रिटिश भारत के अन्दर ऊपर वाले चारो आदमी उस समय के गोरे लोगो के राइट हैंड मान लीजिए और DC के असली खजाना मंत्री थे जिले के खासमखास पावरफुल आदमी थे गोरे लोगो ने लंबरदार की ड्यूटी अपने अपने गांव से राजस्व इकट्ठा करना जैल एक गांवो के समुह का नाम जैलदार 40- 50 गांवों के समुह का जिमेवार होता था कानूनी व्यवस्था को बनाए रखना जमींदार गांव की सारी जमीन के मालिक होते थे अगर एक गांव की 2000 एकड़ जमीन है तो गांव में तीन या चार जमीदार होते थे बाकी गांववासी काश्तकार होते थे अर्थात फसल को बोना काटना  गरीब किसान होते थे या यूं कहे गुलाम होते थे पंजाब में जैलदार को देश में चौधरी या प्रधान बोला जाता था चौधरी का काम जैलदार वाला ही था कानूनी वयवस्था को बनाए रखना गांवों से राजस्व को समय पर जमा करवाना जैलदार को राजस्व का 1%मिलता था लंबरदार को 5% जमीदार को अच्छी फसल होने से अधिक लाभ होता था                  अभी हम इन के ठठबाठ की बात कर लेते है  सब से अधिक name and fame लंबरदार का था कहने को तो जैलदार बड़ा होता था...

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गांव, पृथ्वी के मालिक villages are owners 9f the earth india

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 गांव पृथ्वी के मालिक सचाई यह है पांच सौ साल पहले कोई शहर नही होते थे केवल गांव ही पुरी दुनिया में होते थे शहर का आगमन रेलवे स्टेशनों और कारखानों से हुआ आप देख सकते हो जहां रेलवे स्टेशन वही शहर है प्राचीन काल में सफ्ताह में बाजार मंडी लगाते थे समान वस्तुयो का आपस में बदल करते थे पैसे का कोई लेन देन नही था गांववासी  अपने अपने गांव के प्राकृतिक मालिक थे आज भी गांव ही गांव की जमीन के मालिक हैं जमीन ही उन का माइ बाप है  भगवान ईश्वर है आज शहर गांवो के आगे हाथ जोड़ते हैं हमे जमीन चाहिए कारण जमीन के बिना उद्योगपति किसी काम के नही  किसानों ने अपने गांव की जमीन को बचाने के लिए बहुत कुर्बानीये दी तभी 2013 में कांग्रेस सरकार ने land Acquisition act अर्थात अभी जमीन को सरकार जबरदस्ती से नही छीन सकती किसी सार्वजनिक या देश के हित के लिए ही जमीन मुश्किल शर्तो के आधार पर खरीद कर सकती है शहर में अर्थात  मुंस्सीपल कमेटी नगर निगम  में आने वाली जमीन का बाजारी दो गुणा मूल्य देना होगा अर्थात अगर वहां के एक एकड़ का सरकारी मूल्य पहले से ही 1 करोड़ है तो उस का दो करोड़ देना होगा,ऐसे...